यह कविता मैंने अपनी एक कलिग की विदाई पार्टी में सुनायी थी । ११ अप्रिल को - इस दिन मेरा जन्मदिन भी होता है इसीलिए मुझे यह दिन हमेशा याद रहेगा।
बीते लम्हे कुछ यूं याद आ रहे हैं
गुजरे तीन दशक आंखों मी समाये जा रहें हैं।
इन गलियारों में खड़े होकर सखियों संग बतियाना
कैंटीन मी बैठकर चाय की चुस्कियों के साथ खिलखिलाना
गर्मियों के दुपहरी में कमरे में बैठकर सुस्ताना
सर्दियों की कुंकुनी धुप में बैठकर मूंगफली खाना
सब कुछ याद आ रहे हैं
गुजरे तीन दशक आंखों में समाये जा रहे हैं।
पल पल करते कितने ही पल बीत गए
कल कल करते ६० वर्ष बीत गए
कभी किसी से कुछ कहा तोः किसी से सुना भी
किसी को कुछ दिया तोः बहुत कुछ पाया भी
वो प्यार, वो सम्मान , वो अपनापन सब याद आ रहे हैं।
गुजरे तीन दशक आंखों में समाये जा रहे हैं।
क्या कहे आपसे कुछ कहने के काबिल नही
आपसे बस इतना कहना चाहते हैं के
ख़ुद को ख़ुद से कैसे भुला पाओगे
अपनी पहचान कैसे भुला पाओगे
अंधेरों में जब भी जाओगे तुम
अपने साथ हमे पाओगे तुम।
1 comments:
Waah Shilpa Ji Kya Shabdo Ki Mala Peeroyi Hai Aapne . Milna Bichhadna Prakriti Ka Neeyam Hai . Yadi Bichhadna Nahi Ho to Milne Ki KHush Hum Shayad Kabhi Mehsoos Nahi Kar Pate Very very Very Nice Shilpa Ji
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