सन्देश होली का
आया फागुन का त्यौहार
छाई रंगों की बौछार
कहीं है टेसू के फूल
तो कहीं हैं अबीर गुलाल
लाल पीला हरा गुलाबी
रंगों की छठा है निराली
कहते है ये रंग कुछ हमसे
न हम हिन्दू न हम मुसलमान
न हम सिख न हम ईसाई
हम रंगों ने तो सिर्फ प्रीत ही निभाई
बनो तुम हम रंगों जैसे
हम पानी को भी रंगीन बना देते हैं
न धर्म पूछते हैं न जात पूछते हैं
हम हर चेहरे को गुलज़ार कर देते हैं
हर आँगन खुशियां बिखेरते हैं
हम रंग दे रहे हैं इक सन्देश
न खेलो खून की होली
न बढ़ाओ राग द्वेष
आज बस इतना करना है
हर रिश्ते को संवारना है
"होली है भाई होली" की आवाज़ों से
गली कूचो को गुलज़ार करना है
