Tuesday, May 31, 2022

स्वार्थपरता रिश्तों की

शीर्षक... स्वार्थपरता रिश्तों की शुभ्रा जी व आनंदजी बरामदे में बैठे सुबह की चाय का लुत्फ़ उठा रहे थे । रात भर बारिश होती रही, अभी भी रिमझिम ही रही थी। मौसम एकदम सुहावना हो गया था और आज शनिवार था, वीकेंड शुरू हो गया था तो दोनों आराम से मौसम का आनंद ले रहे थे। चाय पीते पीते आनंद जी ने पत्नी शुभ्रा जी से पूछा " फिर क्या सोचा तुमने..?? आज शनिवार है तुमने सोचने के लिए आज तक का समय मांगा था, कुछ सोचा क्या? बच्चे अभी आ जाएंगे तो क्या जवाब दोगी..??" "आप बताएं मैं क्या करूं?" शुभ्रा जी ने पूछा। " नहीं ये तुम्हारा फैसला है, तुम्हे ही निर्णय लेना है मुझे विश्वास है तुम जो भी फैसला लोगी वो सही ही होगा। फिर भी मैं यह जरूर कहूंगा कि जो तुम्हे पसंद ही वही फैसला लेना। तुमने इस घर के लिए, बच्चों के लिए, बीजी बाऊजी के लिए बहुत किया है, घर को कितनी समझदारी से चलाया है ये किसी से छुपा नहीं है तो अब ये आने वाली ज़िन्दगी को अपने हिसाब से चलाओ, अपनी खुशी भी देखो। तुम जो भी फैसला लोगी मुझे मंजूर है, मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं।" शुभ्रा जी पति की तरफ देखा और मुस्करा कर गर्दन हिला दी। कुछ कहने जा ही रहीं थी कि बेटा - गगन और बहू - चित्रा आ गए और वहीं बैठ गए। शुभ्रा जी ने दोनों से पूछ कर चाय बनाई और दोनों को पकड़ा दी। चाय पीते पीते गगन ने पूछा "और मम्मा आपने क्या सोचा वॉलंटरी रिटायरमेंट ले रही है ना आप..?? 3 महीने पहले ही एप्लीकेशन देनी होती है अभी दोगी तो जून तक ही सब होगा ना, जुलाई से चित्रा ने भी ऑफिस ज्वाइन करना हैं । संचित भी तब तक छह महीने का हो जाएगा ।" कहकर गगन में पत्नी की तरफ देखा चित्रा ने भी हामी में गर्दन हिला दी। शुभ्रा जी ने चाय का कप टेबल पर रख दिया और फिर बेटे बहू की तरफ देखकर कहा - "हां मैंने सोच लिया है और मेरा फैसला है कि मैं VRS नहीं ले रही हूं । 3 साल की नौकरी है अभी मेरी, अगले साल मेरी प्रमोशन भी होने वाली है तो मैं अपनी नौकरी अभी नहीं छोडूंगी।" गगन और चित्रा दोनों का मुंह बन गया। " पर मम्मा 3 साल ही तो रह गए हैं, आपने इतने साल नौकरी की, अब आप आराम करो, घर में बैठो, संचित के साथ टाइम पास करो और पापा भी अगले साल रिटायर हो जाएंगे तो आप दोनों आराम से घर पर रहो । बेनिफिट तो आपको सारे मिलेंगे ही, पेंशन भी मिलेगी तो फिर किस लिए 3 साल के लिए मारामारी करना, संचित को भी दादा दादी का साथ मिल जाएगा आपको प्रॉब्लम ना हो तो एक आया संचित के लिए रख लेंगे और आप उसे बस सुपरवाइज करना।" गगन ने कहा । वो सब ठीक है पर अगले साल मेरी प्रोमोशन है और वार्षिक इंक्रीमेंट में भी बढ़ोतरी होगी जिसका अच्छा असर मेरी पेंशन पर भी पड़ेगा तो मैं क्यों ना तीन साल तक नौकरी करूं..?" "पर मम्मा संचित को फिर कौन देखेगा ? चित्रा को भी ऑफिस ज्वॉइन करना है और संचित को क्रेच छोड़ने के हक में हम नहीं हैं...." बात को बीच में काटते हुए शुभ्रा जी ने कहा- क्रेच में छोड़ने की बात कहां से आ गई अभी तो तुम कह रहे थे कि आया रख लोगे तो वो रख लेना। पापा अगले साल रिटायर हो रहे हैं ना तो कुछ समय की ही बात है फिर पापा देख लेंगे। और to be very frank अब हम भी लाइफ एन्जॉय करना चाहते हैं। तुम्हे और निधि को पढ़ाया लिखाया, तुम दोनों का कैरियर बनाने के लिए ना दिन देखा ना रात देखी बस भागम- भाग में लगे रहे। अब हमारा दिल भी करता है कि जितनी भी ज़िन्दगी बाकी है साथ में गुजार लें... क्यों ?" कहते हुए शुभ्रा जी ने पति की तरफ देखा और उन्होंने भी सिर हिला कर हामी भर दी। अब गगन थोड़े रोष में आ गया " तो सीधा बोलो ना हमारे बच्चे को पालने में आपको तकलीफ हो रही है, आपको अपनी प्रोमोशन, अपनी पेंशन की पड़ी है पर ये ख्याल नहीं है कि बच्चे को घर का वातावरण चाहिए..।" शुभ्रा जी ने हैरानी से बेटे की तरफ देखा कुछ कहती कि आनंद जी बोल उठे " ये तुम किस लहज़े में मां से बात कर रहे हो" चित्रा जी ने हाथ उठा कर पति को और बोलने से रोका और कहा " ये हमारा बच्चा, तुम्हारा बच्चा क्या होता है? अभी तो मैंने सिर्फ अपनी बात रखी है तो तुम रिश्तों में ही मेरा तुम्हारा करने लग गए हो। अब अगर ऐसी बात है तो तुम खुद फैसला करो कि चित्रा नौकरी करेगी या छोड़ेगी या और छुट्टियां लेगी, संचित घर में रहेगा या क्रेच में..?? आज तुम आया लगाने को तैयार हो, कुक भी लगाने को तैयार हो वो समय भूल गए जब मैंने कहा था कि एक कुक लगा लेते हैं तो तुमने क्या कहा था मैं कुक के हाथ का खाना नहीं खा सकता। चित्रा आपकी हेल्प कर देगी.. कितनी हेल्प की उसने मेरी...?? चित्रा, तुम्हारा ऑफिस शाम को छह बजे बंद होता था। साढे छह - सात बजे तक तुम घर आ सकती थी लेकिन नहीं वहां से तुम गगन के ऑफिस जाती थी और तुम दोनों फिर जिम चले जाते थे और रात के नौ बजे आते थे तब तुम्हें याद नहीं आता था कि मां भी साढ़े सात बजे घर आएगी और खाना बनाएगी तब क्यों नहीं तुमसे बोला गया कि चित्रा जल्दी घर आ जाया करेगी। मैंने एक बार तुमसे कहा तो तुमने क्या जवाब दिया मम्मा आप पहले भी तो करती थी तो अब क्या प्रॉब्लम है। तुम्हे मेरी बढ़ती उम्र, उम्र के साथ बढ़ती तकलीफों का कोई एहसास ही नहीं आता था। वीकेंड को हमने भी कहीं जाना है ये सुनते ही तुम दोनों का मूड ऑफ हो जाता था जबकि हर वीकेंड पर तुम लोग बाहर ही होते थे। और भी ऐसी कितनी बातें है जो हमें चुभती थी लेकिन घर की शांति के लिए हम चुप लगा जाते थे। आज जब तुम्हारी अपनी बारी अाई तो हमारा बच्चा... हमारा बच्चा रटने लगे। अपने बच्चे के साथ रिश्ता याद आ रहा है और मां बाप बस गौण हो गए। बेटा घर साझेदारी और समझदारी से चलता है। अपने अपने हिस्से की जिम्मेदारी सबको निभानी पड़ती है यह मेरा तुम्हारा कहकर ना दिलों में और ना रिश्तो में दरार पैदा करो । मैं तो VRS नहीं लूंगी हां अपनी जिम्मेदारी से भी हम पीछे नहीं हटेंगे जितना होगा जरूर करेंगे तुम्हारी उम्मीद से भी बढ़कर करेंगे संचित हमारा भी खून है भविष्य है इस परिवार का पहले भी जिम्मेदारी से नहीं भागे और ना अब भी भागेंगे लेकिन ये जरूर है कि अब हम भी अपनी ज़िन्दगी अपने हिसाब से जीना चाहते हैं अब अगर तुम रिश्तो को सहेजने की जगह रिश्तो को तोड़ना चाहते हो तो यह तुम्हारी मर्जी है परिवार को कैसे जोड़ना है यह अब तुम दोनों सोचो। मैंने अब अपना फैसला तुम्हें बता दिया है।" कहते हुए शुभ्रा जी ने कुर्सी पर पीठ लगाकर अपनी आंखें बंद कर ली।