"अरे ये क्या है, बहुत सुंदर रंग है।" मधु ने अपनी छोटी बहन, नीलम से पूछा जो अपनी अलमारी ठीक कर रही थी। "ये" कहते हुए नीलम ने पूछा और एक लाल रंग का सुंदर सा दुपट्टा निकाला। " हां ये, बहुत सुंदर है किसका है। " मेरा है" नीलम ने कहा तो मधु ने भौंहों को चढ़ाकर पूछा " तेरा..?" "हां, क्यों"? "तूने लिया है ये रंग..?" दोबारा एक प्रश्न उछला मधु की तरफ से। " नहीं, वो मोना भाभी हैं ना जिनके यहां में काम करती हूं ना उन्होंने पिछले महीने मुझे दिया था मेरे जन्मदिन पर"। "और तूने ले लिया" मधु ने थोड़ी तेज आवाज़ में पूछा "तू पहनेगी ये रंग...?" "क्यों, क्यों नहीं पहनूंगी मैं ये रंग..?" " नहीं एकदम चटख लाल रंग है ना इसीलिए पूछा" मधु ने कहा " तो" प्रत्युत्तर में पूछा गया । " नहीं वैसे ही पूछा" जवाब आया। "सब समझती हूं दीदी आप क्यों पूछ रही हैं । अब अगर मेरा आदमी मुझे छोटी उम्र में ही छोड़कर भगवान के पास चला गया तो क्या अब मुझे खुश रहने का , मनपसंद ओढ़ने का भी हक नहीं रहा क्या..? १६ साल की उम्र में आप लोगों ने मेरी शादी करवा दी १९ की उम्र तक मैं दो लड़कियों की मां भी बन गई। २५ की उम्र में पतिदेव भगवान के पास चले गए तो क्या मैं भी जीना छोड़ दूं ? क्या मुझे अब भी खुश रहने का मनपसंद पहनने का हक भी नहीं रहा..?" " पर लोग तो बातें बनाते हैं ना" मधु ने कहा। " कौन से लोग, आप जैसे लोग, जो मुझे मुसीबत में अकेला छोड़कर चले गए थे, किसी ने भी सोचा था कि मैं दो लड़कियों के साथ कैसे ज़िन्दगी बिताऊंगी, तब तो सब को लग रहा था कि कहीं हमारे पल्ले ही ना पड़ जाए। और तब की तो बात छोड़ो अब भी कौन मेरे साथ खड़ा है। कोई सोचता भी है कि मैंने दो दो लड़कियों की भी शादी करनी है। वो तो बच्चियां पढ़ाई में अच्छी है तो थोड़ी चिंता कम हो गई। " पर समाज..." मधु ने अभी इतना ही कहा कि नीलम एकदम तड़प कर बोली " कौनसा समाज दीदी कैसा समाज। समाज ने मुझे क्या दिया जो मैं समाज से डरूं। वो तो भला हो मोना भाभी का जिन्होंने मुझमें इतनी हिम्मत पैदा की। और एक बात बताओ दीदी ये रंग कब से खुशी और गमी का प्रतीक बन गए हैं। अगर ऐसा है तो तुमने ये सफेद रंग का सूट क्यों पहन रखा है जीजाजी तो अभी....कहते हुए नीलम ने बात को अधूरा छोड़ा और फिर कहा " आप जैसे लोग सफेद रंग पहने तो फैशन और हम जैसे लोग लाल रंग पहने तो ... हम पर सवालिया निगाहें क्यों...? और ये कहते हुए नीलम ने वो लाल दुपट्टा अपने कंधे पर डाल दिया।
शिप्पी नारंग
नई दिल्ली

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