Tuesday, March 16, 2021

ठाकुर जी का भोग

 


बेटी नेहा के घर के घुसते ही निशा जी, नेहा की मम्मी ने नेहा की सासू मां सुषमाजी के पास जाकर उनका हाथ अपने दोनो हाथों में लिया और बोलने लगी "मैं नेहा की तरफ से माफी मांगती हूं। अक्ल नहीं है इसीलिए ऐसा काम कर दिया । मैंने बहुत डांटा उसे और समझा भी दिया है आगे से ऐसा नहीं करेगी आप मेरा विश्वास करें ।" "पर उसने किया क्या है..?" प्रश्न आया । "आपको नहीं पता..?" हैरानी भरा स्वर उभरा। "अरे ठाकुर जी के भोग वाली बात न.. पता है" सुषमाजी की आवाज़ आई । " आपको कुछ गलत नहीं लगा" अब स्वर में बैचैनी थी। " नहीं तो गलत क्या था इसमें । नेहा ने ठाकुर जी को भोग लगा दिया मैगी का  सही तो क्या हुआ, भोग लगाया तो" और फिर  आगे कहने लगी " देखिए आप को तो पता है में हर महीने दो तीन दिन के लिए वृन्दावन जाती हूं इस बार  तीन चार महीने से शादी में बिजी होने की वजह से नहीं गई तो सोचा कि चलो सब अच्छे से निपट गया तो वृन्दावन चली जाती हूं । पहले जब जाती थी तो आकाश की ताई जी ठाकुर जी को भोग लगा दिया करती थी पर इस बार वो भी साथ जा रहीं थी तो मैं सोच रही थी कि क्या करूं तो नेहा ही बोली कि मम्मा आप जाओ मैं लगा दूंगी भोग तो मैं निश्चिन्त हो गई और चली गई । आकाश हंस भी रहा था कि कुछ पता भी है पर नेहा ने कहा हां में देख लूंगी जो हम खाएंगे वो ठाकुर जी को भी खिला दूंगी। अब उसने मैगी बनाई और ठाकुर जी को भी खिला दी तो क्या हुआ।" "पर"....निशाजी कुछ कहती उससे पहले सुषमा जी अब कुछ गंभीर स्वर में बोल उठीं " देखिए हमारे कुछ संस्कार होते हैं जिनसे हम बंधे हुए होते हैं और चाहते हैं कि हमारे बच्चे भी उन्हें अपनाएं और वो जब अपनाते  हैं तो हमें अच्छा लगता है पर हम वही नियम या संस्कार उन पर थोपें तो ये गलत है। आज का माहौल आप देख रही हैं ज़िन्दगी कितनी तनाव भरी है। बच्चों को सुबह सुबह ७-७.३० बजे तक निकालना होता है आते आते ८-९ बजना मामूली बात है। अब उस पर हम अपने नियमों से उन्हें बांध दे तो गलत है ना और फिर एक बात और मैंने नोट की है कि हम आज की पीढ़ी को खासकर लड़कियों को गैर जिम्मेदार मानते हैं कि बस ये तो काम करना ही नहीं चाहती अपने से ही मतलब रखती हैं पर ऐसा है नहीं। समय आने पर सब अच्छे से संभाल लेती हैं हां तरीका जरूर अलग होता है। अब नेहा ने समय की कमी होते हुए भी दिल से भोग  लगाया चाहे मैगी का ही सही लगाया तो ... तो क्या यह बड़ी बात नहीं है । मुझे तो बड़ी खुशी हो रही है कि उसने मेरी बात का मान रखा, नियम को तोड़ा नहीं और ठाकुर जी को भी भूखा नहीं रखा और फिर मेरा यह भी मानना है कि ठाकुर जी भावना के भूखे होते हैं पकवानों के नहीं...क्यों नेहा।" नेहा खिलखिलाकर हंस पड़ी और इतने में नेहा के ससुर जी बोल पड़े मैं तो कह रहा था कि इस बार ठाकुर जी बहुत खुश होंगे रोज़ दूध, माखन मिश्री खाकर बोर हो गए होंगे चलो नई बहू के राज में कुछ नया खाने को तो मिला" और कमरा ठहाकों से गूंज उठा।

शिप्पी नारंग (laghukatha ke parinde)
नई दिल्ली
10/3/2021

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