यह कविता मेरी एक दोस्त ने मुझे ऑरकुट पर भेजी है, अवनि जिनका नाम है, कविता उन्ही की लिखी है जो उन्होंने मुझे भेजी थी, मैं इस कविता को हमेशा अपने पास रखना चाहती हूँ इसिलिएये अपने ब्लॉग में इसे लिख रही हूँ ..........
मेरी सहेली एक नटखट, मेरी सहेली है
थोडी सी चुलबुली थोडी सी नटखट है
उनकी बातें मुझको भाती मीठी मीठी प्यारी प्यारी
अंदाज़ उनका निराला निराला sबातें करती पट पट पट
मस्ती से भरी उनकी बातें महका जाती मेरे मन को
बातों से उनकी लगता जैसे फूल झर रहे हो झर झर झर
ऐसा रूप उनका सुहाना अवनि पर जैसे फूल खिल गए हो हजारों
वो आती जब मेरे स्क्रैप पर
मैं घंटो निहारती उनको टकटकटकटक
khoobsurati में क्या कहना उनका
जैसे fursat में gada हो shilpkar ने shilpa को
घर से जब वो निकलती to commn। wale kehte हैं
रुक रुक रुक रुक
इसमे